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Diabetes diet science - रोज़ फास्टिंग ब्लड शुगर 100 से नीचे क्यों ज़रूरी है?

 Diabetes diet science - रोज़ फास्टिंग ब्लड शुगर 100 से नीचे क्यों ज़रूरी है?



 बहुत लोग ये सोचते हैं कि अगर फास्टिंग ब्लड शुगर 2 महीने, 6 महीने या एक साल तक कंट्रोल में रहा, तो काम हो गया। लेकिन सच यह है कि इससे बात नहीं बनती।


अगर डायबिटीज को सच में दूर रखना है, तो हमें फास्टिंग ब्लड शुगर को रोज़ 100 के नीचे मेंटेन करना होगा।


डायबिटीज को रिवर्स या कंट्रोल करने के लिए सिर्फ दवा नहीं, बल्कि सोच और समझ की लेवल बढ़ानी पड़ती है। इसे ही कहते हैं –

डायबिटीज की vocabulary बढ़ाना।


डायबिटीज की Vocabulary: ये 3 शब्द समझना ज़रूरी है

अगर आप इन तीन शब्दों को ठीक से नहीं समझते, तो डायबिटीज को कंट्रोल करना मुश्किल हो जाएगा।


Calories

Glycemic Index (GI)

Glycemic Load (GL)


अब एक-एक करके समझते हैं।


Calories क्या होती है? (असल साइंस)

कैलोरी असल में कोई डाइट टर्म नहीं है।

Calorie is a unit of heat.


मतलब,

1 किलो पानी का तापमान 1 डिग्री सेल्सियस बढ़ाने के लिए जितनी गर्मी चाहिए, उसे 1 कैलोरी कहते हैं।


अब आप सोच रहे होंगे –

“ये तो फिजिक्स है, थर्मोडायनेमिक्स है, न्यूट्रिशन इसमें कहाँ से आ गया?”


सवाल बिल्कुल सही है।


Food Calories कैसे मापी जाती हैं?

फूड की कैलोरी निकालने के लिए Food Calorimeter इस्तेमाल होता है।


इसमें खाना जलाया जाता है।

उसके ऊपर पानी रखा जाता है।

खाना जलने से पानी का तापमान जितना बढ़ता है, उसी से तय किया जाता है कि उस खाने में कितनी कैलोरी है।


मतलब साफ है –

खाना जलाओ - गर्मी निकले - पानी गरम हो - कैलोरी माप लो।


Nutrition में Calories कैसे घुस गई?

ये कहानी शुरू होती है 1890 से।


अमेरिका में एक साइंटिस्ट थे – Wilbur Olin Atwater।

उन्हें US Government ने फंड किया था।


उन्होंने कहा –

“Steam engine में जब कोयला जलता है, तो एनर्जी निकलती है और इंजन चलता है।

तो इंसान के शरीर में भी खाना जलकर एनर्जी देता होगा।”


यहीं से food calorie का कॉन्सेप्ट आया।


सरकार ने कहा –

“अगर एक इंसान को 24 घंटे शरीर का तापमान बनाए रखना है, तो इतनी हीट चाहिए, यानी इतनी कैलोरी।”


तो दाल, चावल, चीनी, घी – सबको कैलोरी में बदलकर देखना शुरू किया गया।


Calories का Boom और बड़ी गलती

1970 के आसपास सरकार ने नियम बना दिया कि

हर पैकेट वाले खाने पर calorie value लिखना ज़रूरी होगा।


इसे नाम दिया गया – Nutritional Value

लेकिन असल में उसमें मुख्य चीज सिर्फ कैलोरी थी।


यहीं से प्रॉब्लम शुरू हुई।


क्योंकि उसी समय डायबिटीज तेज़ी से बढ़ रही थी।


डायबिटीज में असली समस्या क्या है?

डायबिटीज में प्रॉब्लम हीट या एनर्जी की नहीं है।

डायबिटीज में प्रॉब्लम है –

ब्लड ग्लूकोस।


हम बुखार नहीं माप रहे।

हम ब्लड शुगर माप रहे हैं।


तो फिर सवाल उठता है –

डायबिटिक डाइट कैलोरी के बेसिस पर कैसे बने?


Glycemic Index: एक बड़ा Revolution (1981)

यहीं पर एंट्री होती है

Dr. David Jenkins (Canada) की।


उन्होंने कहा –

“हम ये क्यों नहीं देखते कि कौन सा खाना ब्लड शुगर बढ़ाता है और कितनी तेज़ी से बढ़ाता है?”


उन्होंने Glycemic Index (GI) का कॉन्सेप्ट दिया।


Glycemic Index क्या है?

ग्लूकोस को स्टैंडर्ड माना गया


पानी में ग्लूकोस पीने से ब्लड शुगर जितनी तेजी से बढ़ती है, उसे 100 मान लिया गया


बाकी सभी फूड्स को उसी से कंपेयर किया गया


1981 में उनका ओरिजिनल रिसर्च आया –

Glycemic Index of Foods


62 फूड आइटम्स पर रिसर्च हुई।


उदाहरण:


Whole wheat bread – GI 72

Rice – GI करीब 70

Peanut – GI 13

Soybean – GI 15


इससे डायबिटीज डाइट काफी आसान हो गई।


Glycemic Index की Limitation

GI सिर्फ speed बताता है।

Quantity नहीं देखता।


अगर किसी चीज़ का GI 70 है, तो वो

50 ग्राम हो या 500 ग्राम – GI वही रहेगा।


लेकिन ब्लड शुगर बराबर नहीं बढ़ेगा।


उदाहरण:

Watermelon का GI ~70

Wheat flour का GI ~70


फिर भी दोनों ब्लड शुगर एक जैसा नहीं बढ़ाते।

क्योंकि watermelon में carbohydrate बहुत कम है।


Glycemic Load: Ultimate Concept

फिर Harvard University के साइंटिस्ट्स ने कहा –

“GI अच्छा है, लेकिन उसमें carbohydrate की मात्रा जोड़नी पड़ेगी।”


यहीं से आया Glycemic Load (GL)।


Formula:

GL = (GI × Total Carbohydrate) ÷ 100


अब picture बिल्कुल clear हो गई।


उदाहरण:


Watermelon: GI 70, Carb 3g - GL = 2

Wheat flour: GI 70, Carb ज़्यादा - GL बहुत ज़्यादा


यहीं समझ आया कि

Glycemic Load ही असली game changer है।


Calories vs Glycemic Load

Calories के हिसाब से:


घी = 900 calories

गेहूं का आटा = 370 calories


तो logic कहता है –

घी कम खाओ, गेहूं ज़्यादा खाओ।


लेकिन Glycemic Load के हिसाब से:


घी का GL = 0 (ब्लड शुगर नहीं बढ़ाता)

गेहूं का GL = ज्यादा (ब्लड शुगर बढ़ाता है)


तो साफ है –

Sugar control calories से नहीं, Glycemic Load से होता है।


Quantity और Confusion

Glycemic Load quantity पर depend करता है।


20 ग्राम आटा → GL अलग

100 ग्राम आटा → GL बहुत ज़्यादा


इसीलिए लोग confuse हो जाते हैं:

“मेरे प्रोडक्ट का GL कम है”

“मेरे serving size में कम है”


EGL Chart: Confusion खत्म करने का तरीका

इस confusion को खत्म करने के लिए

EGL (Equivalent Glucose Load) chart बनाया गया।


हर चीज़ 100 ग्राम के बेसिस पर


1 EGL = 1 ग्राम ग्लूकोस के बराबर

इससे comparison आसान हो जाता है।


Final Takeaway

डायबिटीज मैनेजमेंट के लिए

तीन शब्द ज़रूरी हैं:


Calories (history समझने के लिए)

Glycemic Index (speed समझने के लिए)

Glycemic Load (control के लिए)


अगर फास्टिंग ब्लड शुगर रोज़ 100 से नीचे रखना है,

तो ultimate word है Glycemic Load।


इतना clear science अगर समझ में आ गया,

तो डायबिटीज आपके कंट्रोल में होगी,

आप डायबिटीज के कंट्रोल में नहीं।


आज आपने क्या सीखा? क्या GL पहले सुना था?


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