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Healthy Carbohydrates - क्या कार्बोहाइड्रेट सच में ब्लड शुगर बढ़ाते हैं?

 Healthy Carbohydrates - क्या कार्बोहाइड्रेट सच में ब्लड शुगर बढ़ाते हैं? क्या आप कार्बोहाइड्रेट खाते तो हैं, लेकिन मन में डर भी रहता है कि कहीं इससे ब्लड शुगर न बढ़ जाए, वजन न बढ़ जाए?




कभी लगता है कार्ब्स जरूरी हैं, तो कभी लगता है इन्हें पूरी तरह छोड़ देना चाहिए।

अक्सर यह कन्फ्यूजन रहता है कि कार्बोहाइड्रेट खाने का सही तरीका क्या है, कौन से कार्ब्स सेहत के लिए सुरक्षित हैं और किनसे नुकसान होता है।


सच्चाई यह है कि ज़्यादातर लोगों की डाइट का 50 से 70 प्रतिशत हिस्सा कार्बोहाइड्रेट्स से ही बनता है।

लेकिन समस्या कार्बोहाइड्रेट नहीं है, समस्या है


गलत कार्बोहाइड्रेट का चुनाव

गलत मात्रा

और गलत समय पर सेवन


इसी वजह से वजन बढ़ता है, ब्लड शुगर बिगड़ता है और हेल्थ पर नेगेटिव असर पड़ता है।


इस Post में विस्तार से समझेंगे कि

कार्बोहाइड्रेट कैसे खाए जाएँ ताकि वे शरीर के लिए नुकसान नहीं बल्कि फायदेमंद बनें।


सबसे पहले समझिए – हर कार्ब एक जैसा नहीं होता

कार्बोहाइड्रेट खाने का सबसे पहला और सबसे जरूरी नियम है

होल ग्रेन्स को चुनना और रिफाइंड ग्रेन्स से दूरी बनाना।


होल ग्रेन्स में


फाइबर

विटामिन

मिनरल्स


मौजूद होते हैं, जो

ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखते हैं और लंबे समय तक एनर्जी देते हैं।


बेहतर विकल्प:

ओट्स, जौ, ब्राउन राइस, गेहूं, क्विनोआ


जिनसे बचना चाहिए:

मैदा, सफेद ब्रेड, सफेद चावल, बेकरी आइटम्स


फल और सब्ज़ियाँ: कार्ब्स का स्मार्ट सोर्स

फल और सब्ज़ियाँ भी कार्बोहाइड्रेट देती हैं, लेकिन ये

फाइबर, एंटीऑक्सिडेंट्स और माइक्रोन्यूट्रिएंट्स से भरपूर होती हैं।


इसलिए ये

ब्लड शुगर को अचानक नहीं बढ़ातीं और वजन बढ़ने का रिस्क भी कम रहता है।


अच्छे विकल्प:

सेब, बेरीज, हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ, ब्रोकली, गाजर, शकरकंद


ये कार्ब्स शरीर को पोषण देते हैं, खाली कैलोरी नहीं।


दालें, बीन्स और चने – कार्ब भी, प्रोटीन भी

दालें, बीन्स, छोले, मटर और अंकुरित अनाज

कार्बोहाइड्रेट के साथ-साथ प्रोटीन और फाइबर भी देते हैं।


इसका फायदा यह होता है कि


ब्लड शुगर धीरे-धीरे बढ़ता है

भूख देर तक नहीं लगती

ओवरईटिंग से बचाव होता है


इसलिए इन्हें डाइट में शामिल करना बहुत जरूरी है।


फाइबर के बिना कार्ब्स अधूरे हैं

अगर कार्बोहाइड्रेट फाइबर के साथ लिया जाए तो

उसका अब्ज़ॉर्प्शन स्लो होता है।


इससे


शुगर स्पाइक्स कम होते हैं

इंसुलिन पर दबाव नहीं पड़ता

हेल्थ बेहतर रहती है


पालक, ब्रोकली, ब्रसेल्स स्प्राउट्स, छिलके वाले फल, ओट्स और दालें

फाइबर से भरपूर कार्ब सोर्स हैं।


कार्बोहाइड्रेट अकेले मत खाइए

सिर्फ कार्बोहाइड्रेट खाना

ब्लड शुगर को तेज़ी से बढ़ाता है।


लेकिन जब कार्ब्स को

प्रोटीन और हेल्दी फैट्स के साथ मिलाकर खाया जाता है,

तो शुगर का असर काफी कंट्रोल में रहता है।


उदाहरण:

होल ग्रेन टोस्ट + एवोकाडो

दही + बेरीज + नट्स

दाल + चावल + सब्ज़ी


इस तरह का कॉम्बिनेशन शरीर के लिए ज्यादा सुरक्षित होता है।


फल भी हमेशा खाने के साथ खाइए

फल अगर अकेले या जूस के रूप में लिए जाएँ,

तो वे सिर्फ कार्बोहाइड्रेट की तरह काम करते हैं।


खासकर फ्रूट जूस में

फाइबर लगभग खत्म हो जाता है,

जिससे शुगर तेजी से बढ़ती है।


इसलिए फल

हमेशा खाने के साथ या भोजन के हिस्से के रूप में लें,

ना कि अलग से।


प्रोसेस्ड कार्ब्स सबसे खतरनाक हैं

जितना ज्यादा प्रोसेस्ड कार्बोहाइड्रेट होगा,

उतनी जल्दी वह ब्लड में शुगर में बदलेगा।


इनसे बचें:

सफेद ब्रेड, मिठाइयाँ, केक, पेस्ट्री, चिप्स, कुकीज़, शुगर सीरियल्स, सोडा


ये चीजें

भूख भी बढ़ाती हैं और वजन भी।


मात्रा पर कंट्रोल सबसे जरूरी है

चाहे कार्ब कितना भी हेल्दी क्यों न हो,

अगर मात्रा ज्यादा है तो नुकसान होगा।


कोशिश करें कि


प्लेट का 1/4 हिस्सा ही कार्ब्स का हो

पूरे दिन के कार्ब्स 30–40% से ज्यादा न हों


मेज़र करके खाना

बहुत बड़ा फर्क लाता है।


कार्बोहाइड्रेट कब खा रहे हैं, यह भी मायने रखता है

एक्सरसाइज से पहले या बाद में कार्ब्स लेना

ज्यादा सुरक्षित होता है।


लेकिन

रात देर से या बिना एक्टिविटी के

ज्यादा कार्ब्स लेना

वजन बढ़ाने का कारण बनता है।


हाई ग्लाइसेमिक फूड्स से दूरी रखें

जिन चीज़ों का ग्लाइसेमिक इंडेक्स ज्यादा होता है,

वे ब्लड शुगर को अचानक बढ़ा देती हैं।


ब्रेड, कैंडी, सोडा, प्रोसेस्ड स्नैक्स

इंसुलिन रेजिस्टेंस और सूजन बढ़ाते हैं।


शुगर ड्रिंक्स नहीं, पानी पिएँ

फ्रूट जूस, सोडा और मीठे ड्रिंक्स

खराब कार्ब्स का सबसे आसान रास्ता हैं।


इनकी जगह

पानी, स्पार्कलिंग वाटर या हर्बल टी बेहतर विकल्प हैं।


डायबिटिक और एथलीट्स के लिए अलग नियम

डायबिटिक लोगों को

अपने ब्लड शुगर के हिसाब से कार्ब्स चुनने चाहिए।


एथलीट्स या ज्यादा एक्टिव लोगों को

कार्ब्स की जरूरत ज्यादा हो सकती है।


Conclusion

कार्बोहाइड्रेट आपका दुश्मन नहीं है।

गलत चुनाव, गलत मात्रा और गलत समय

उसे दुश्मन बना देता है।


सही टाइप, सही क्वांटिटी और सही टाइमिंग

कार्बोहाइड्रेट को आपकी सेहत का दोस्त बना सकती है।


अगली बार जब आप रोटी या चावल खाएँ,

तो यह ज़रूर सोचें

क्या, कितना और कब खा रहे हैं।


यही असली फर्क पैदा करता है।


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