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Vata Pitta Kapha Diet - अपनी प्रकृति के अनुसार सही डाइट क्यों ज़रूरी है?

 Vata Pitta Kapha Diet - अपनी प्रकृति के अनुसार सही डाइट क्यों ज़रूरी है? 


अपनी प्रकृति यानी बॉडी टाइप के अनुसार खानपान कैसे चुना जाए। अक्सर लोग यही गलती करते हैं कि एक ही डाइट प्लान को सब पर लागू करने की कोशिश करते हैं, जबकि आयुर्वेद साफ़ कहता है कि हर व्यक्ति अलग है।


हर इंसान की प्रकृति अलग होती है—वात, पित्त या कफ।


जब इनमें से कोई भी दोष असंतुलित होता है, तभी शरीर में लक्षण और बीमारियाँ दिखने लगती हैं।

अच्छी बात यह है कि आयुर्वेद हमें यह भी सिखाता है कि दोष बढ़ने पर उसी के अनुसार खानपान बदलकर स्थिति को संतुलित किया जा सकता है।


वात दोष कैसे पहचानें?

आयुर्वेद में वात दोष का मुख्य गुण बताया गया है—रूक्षता (Dryness)।


अगर आपके शरीर में वात बढ़ा हुआ है, तो आपको ये लक्षण दिख सकते हैं:


त्वचा और बालों में ज़्यादा रूखापन

कब्ज़, हार्ड स्टूल, मल त्याग में तकलीफ

जोड़ों में दर्द या कटकट की आवाज़

वज़न बढ़ाने में कठिनाई, लेकिन जल्दी वज़न घट जाना

मन की चंचलता, ज़्यादा सोच, नींद की कमी, एंग्ज़ायटी


ऐसे लोगों की पाचन शक्ति भी विषम (Irregular) होती है-

कभी बहुत भूख लगती है, कभी बिल्कुल नहीं।


वात दोष में डाइट का मूल सिद्धांत

आयुर्वेद में वात चिकित्सा का पहला सूत्र है:

“स्नेह से वात को शांत करो।”


आजकल ज़ीरो ऑयल कुकिंग का ट्रेंड है, लेकिन यह वात प्रकृति वालों के लिए नुकसानदेह हो सकता है।

क्योंकि वात पहले से ही रूखा होता है, ऐसे में तेल या घी पूरी तरह बंद करना समस्याएँ बढ़ा देता है।


तिल का तेल और घी क्यों ज़रूरी है?

तिल का तेल (Sesame Oil) वात के लिए सबसे श्रेष्ठ माना गया है

इसमें स्निग्धता है और इसकी तासीर गर्म होती है

वात में ठंडापन होता है, इसलिए तिल का तेल उसे संतुलित करता है


कैसे लें?

थोड़े गुनगुने पानी में 1–2 चम्मच तिल का तेल मिलाकर पी सकते हैं।

अगर तेल पसंद न हो, तो देसी गाय का घी बेहतर विकल्प है।


दिन में 2–3 चम्मच घी

दाल, चावल या रोटी पर लगाकर लें।


वात दोष में कौन-से स्वाद ज़रूरी हैं?

आयुर्वेद में छह रस बताए गए हैं:

मधुर, अम्ल, लवण, कटु, तिक्त, कषाय


वात को शांत करने के लिए ज़रूरी हैं:


1. मधुर (मीठा)

दूध, घी, मक्खन

मुनक्का, खजूर, अंजीर

गुड़, मिश्री


2. अम्ल (खट्टा)

नींबू, अनार

आंवले, हल्दी या नींबू का अचार


3. लवण (नमकीन)

हल्का सुपाच्य नमकीन भोजन

सूप, दलिया, खिचड़ी

खाना हमेशा गर्म और ताज़ा होना चाहिए।


मिलेट्स: किसके लिए सही, किसके लिए नहीं?

मिलेट्स रूखे होते हैं।

अगर किसी को मोटापा, फैटी लिवर या हाई कोलेस्ट्रॉल है, तो मिलेट्स फायदेमंद हैं।


लेकिन वात प्रकृति वालों के लिए ज़्यादा मिलेट्स नुकसान कर सकते हैं।


सर्दियों में:


बाजरा लिया जा सकता है

बाजरे की रोटी पर घी और थोड़ा गुड़ ज़रूर जोड़ें

रोज़ाना मिलेट्स लेना वात वालों के लिए सही नहीं।


पित्त दोष कैसे पहचानें?

पित्त के गुण हैं: तीक्ष्णता और उष्णता (Heat)


पित्त बढ़ने पर ये लक्षण दिखते हैं:


शरीर में अंदरूनी गर्मी

ज़्यादा पसीना, बदबू

स्किन एलर्जी, रैशेज़

बालों का जल्दी सफेद होना

हथेलियों, तलवों या पेशाब में जलन

गुस्सा, चिड़चिड़ापन

बार-बार भूख और प्यास लगना


पित्त दोष में क्या खाएं?

घी पित्त का सबसे अच्छा संतुलक

देसी गाय का घी रोज़ लें

रात को गर्म दूध में 1 चम्मच घी फायदेमंद है


अन्य लाभकारी चीजें

नारियल तेल

सफेद मक्खन + मिश्री

काले मुनक्के (8–10 भिगोकर)

अंजीर

आंवले का मुरब्बा

गुलकंद


औषधियाँ

मुलेठी चूर्ण: ½–1 चम्मच

शतावरी चूर्ण या कल्क


पित्त में कौन-से स्वाद बढ़ाएं?

पित्त को शांत करते हैं:


मधुर (मीठा)

तिक्त (कड़वा)

कषाय (कसैला)


जैसे:


करेले की सब्ज़ी

नीम के पत्ते

आंवला


कफ दोष कैसे पहचानें?

कफ प्रकृति के लोग:

मज़बूत शरीर वाले

वज़न जल्दी बढ़ता है

सुस्ती, आलस

ज़्यादा नींद

बार-बार सर्दी-खांसी

इनकी पाचन अग्नि मंद होती है।


कफ दोष में डाइट कैसे रखें?

हल्का, रूखा और गर्म खाना

भूनी हुई चीजें

जौ और मिलेट्स

मसाले: अदरक, काली मिर्च, दालचीनी


शहद का सही उपयोग

पानी उबालें, ठंडा करें

फिर शहद मिलाएँ

गर्म पानी + शहद नहीं


कफ में कौन-से स्वाद ज़रूरी हैं?

कटु (तीखा)

तिक्त (कड़वा)

कषाय (कसैला)


जैसे:

त्रिकटु चूर्ण

करेले, नीम

गिलोय

मसाला छाछ

हरड़

पान (अजवायन के साथ)


कफ में उपवास कब करें?

कफ ज़्यादा हो तो:

लंघन या हल्का उपवास लाभकारी

लेकिन वात और पित्त वालों को फास्टिंग से बचना चाहिए।


Conclusion

वात, पित्त और कफ—तीनों के लिए डाइट अलग होती है।

एक ही खानपान सबके लिए सही नहीं होता।


अगर हम अपनी प्रकृति को समझकर खाते हैं,

तो बीमारियों से बचाव अपने आप हो जाता है।


आपकी प्रकृति क्या है? कमेंट करें

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