Health and fitness tips hindi and english

Millets Ayurveda - हर अनाज सबके लिए नहीं - प्रकृति के अनुसार अनाज

 Millets Ayurveda - हर अनाज सबके लिए नहीं - प्रकृति के अनुसार अनाज - मल्टीग्रेन या सिंगल ग्रेन - अगर आपके मन में मिलेट्स को लेकर सवाल हैं - कि आपके लिए ज्वार, बाजरा, रागी या गेहूं में से कौन सा अनाज सही रहेगा, या फिर मल्टीग्रेन आटा सच में हेल्दी है या नहीं, तो यह जानकारी खास आपके लिए है।


आजकल सोशल मीडिया पर मिलेट्स को लेकर बहुत ज़्यादा बातें हो रही हैं।

कोई इन्हें सुपरफूड बता रहा है, कोई हर बीमारी का इलाज।

लेकिन आयुर्वेद चीज़ों को ट्रेंड से नहीं, शरीर की प्रकृति और पाचन शक्ति से देखता है।


आज हम ज्वार, बाजरा और रागी को आयुर्वेदिक नज़रिए से समझने की कोशिश करेंगे -

कि किसे क्या सूट करता है,

किसे सावधानी रखनी चाहिए,

और किस मौसम में कौन सा अनाज बेहतर रहता है।


आयुर्वेद और अनाज: बेसिक समझ

आयुर्वेद में हर अनाज के बारे में स्पष्ट रूप से बताया गया है:


उसका रस (स्वाद)

वीर्य (तासीर)

गुण (हल्का, भारी, रूखा, स्निग्ध)

और शरीर पर उसका दोषों पर प्रभाव


इसी आधार पर तय होता है कि कोई अनाज

आपके लिए औषधि बनेगा या परेशानी।


1. ज्वार (Sorghum): हल्का लेकिन सबके लिए नहीं

ज्वार के आयुर्वेदिक गुण

पचने में हल्का

रूखा स्वभाव

ठंडी तासीर

कफ और पित्त को कम करता है


जिन लोगों को गेहूं की रोटी भारी लगती है,

या जिन्हें शाम के समय हल्का भोजन चाहिए,

उनके लिए ज्वार एक अच्छा विकल्प हो सकता है।


ज्वार किसके लिए फायदेमंद है

मोटापा

फैटी लिवर

बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल

डायबिटीज

कफ प्रधान शरीर


छाछ के साथ ज्वार की रोटी ब्लड शुगर को बैलेंस रखने में मदद कर सकती है।

वजन घटाने वालों के लिए भी यह उपयोगी है।


ज्वार में सावधानी क्यों ज़रूरी है

आयुर्वेद के अनुसार ज्वार में:


रूखापन

हल्कापन

शीतलता


ये तीनों गुण वात दोष को बढ़ाते हैं।


इसलिए:


जिनकी वात प्रकृति है

जिनकी स्किन बहुत ड्राई रहती है

जिन्हें कब्ज की समस्या रहती है

उन्हें ज्वार बहुत संभलकर लेना चाहिए।


अगर लेना हो तो:


मात्रा कम रखें

हफ्ते में 1–2 बार

ऊपर से अच्छी मात्रा में घी ज़रूर डालें


2. बाजरा (Pearl Millet): ताक़त देने वाला अनाज

बाजरे के गुण

गर्म तासीर

पचने में ज्वार से भारी

वात और कफ को कम करता है

अग्नि को बढ़ाता है

बाजरा खासकर सर्दियों और बरसात के मौसम में बेहतर रहता है।


पारंपरिक कॉम्बिनेशन क्यों सही हैं

बाजरे की रोटी पर:


घी

गुड़


यह कॉम्बिनेशन आयुर्वेदिक रूप से बहुत संतुलित है।

घी और गुड़ बाजरे के रूखेपन और गर्मी को बैलेंस करते हैं।


बाजरा किसके लिए फायदेमंद

कमजोरी

खून की कमी

वज़न बढ़ने से डायबिटीज

घुटनों का दर्द

डिलीवरी के बाद महिलाओं में दूध की कमी


किन लोगों को सावधानी रखनी चाहिए

जिनके शरीर में पहले से ज़्यादा गर्मी रहती है

बार-बार एसिडिटी होती है


ऐसे लोग:


मात्रा कम रखें

गर्मी के मौसम में बार-बार न लें


3. रागी (Finger Millet): सबसे बैलेंस्ड मिलेट

रागी की खासियत

न बहुत गर्म

न बहुत ठंडी

पचने में संतुलित

तृप्ति देने वाला


रागी को आयुर्वेद में:


बल देने वाला

पोषण बढ़ाने वाला

खून और कैल्शियम बढ़ाने वाला


माना गया है।


रागी किसके लिए बेस्ट है

छोटे बच्चे

बुज़ुर्ग

महिलाएं

कमजोरी वाले लोग


रागी से:


आयरन

कैल्शियम

एनर्जी


तीनों मिलते हैं।


रागी लेने के तरीके

रोटी

लड्डू

रागी malt (5 मिनट में बनने वाली)


यह पूरे साल लिया जा सकता है।


4. बच्चों के लिए कौन सा अनाज सही?

बच्चों को:


पोषण चाहिए

हल्का पाचन चाहिए


इसलिए:

गेहूं सीमित मात्रा में

रागी बहुत अच्छा विकल्प

मिलेट्स धीरे-धीरे और कम मात्रा में


5. मल्टीग्रेन आटा: आयुर्वेद क्यों मना करता है?

आजकल ट्रेंड है:

सब अनाज मिलाकर आटा पिसवाना।


लेकिन आयुर्वेद के अनुसार:

हर अनाज की


तासीर

पाचन समय

गुण


अलग होते हैं।


जब आप:

गर्म और ठंडे

हल्के और भारी


अनाज एक साथ मिलाते हैं,

तो यह विरुद्ध आहार बन जाता है।


समस्या क्या होती है

पाचन धीमा

गैस

ब्लोटिंग

डायजेशन से जुड़ी बीमारियां


ठीक वैसे ही जैसे:

हम सब तेल मिलाकर इस्तेमाल नहीं करते।


आयुर्वेद का सिंपल नियम

खाना जितना सिंपल:


एक अनाज

एक दाल

एक सब्ज़ी

उतना ही पाचन आसान।


बहुत ज़्यादा मिक्सिंग:

शरीर के लिए उतनी ही मुश्किल।


आख़िरी बात

आपके लिए कौन सा अनाज सही है, यह तय करता है:


आपकी प्रकृति

आपका पाचन

आपका मौसम

और आपकी आदतें


ट्रेंड देखकर नहीं,

शरीर को समझकर अनाज चुनिए।


उम्मीद है यह जानकारी

आपको सही निर्णय लेने में मदद करेगी।


कमेंट में बताइए — आप अभी कौन-सा अनाज खाते हैं?

ज्वार, बाजरा, रागी या गेहूं

No comments: