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Vata Pitta imbalance - वात-पित्त का घरेलू इलाज

 Vata Pitta imbalance - वात-पित्त का घरेलू इलाज -



 गैस भी, एसिडिटी भी और वजन भी घट रहा है? तो मामला सिर्फ पेट का नहीं है - क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि पेट में गैस और सूजन रहती है, लेकिन जैसे ही आप गर्म पानी, सौंठ या अदरक लेते हैं, सीने में जलन और एसिडिटी शुरू हो जाती है?


क्या आप जो भी खाते हैं, ऐसा लगता है कि शरीर उसे स्वीकार ही नहीं कर रहा?

और इसी के साथ वजन लगातार गिरता जा रहा है, कमजोरी इतनी कि दिन निकालना मुश्किल हो गया है?


अगर इन सवालों का जवाब हां है, तो आप एक सिंपल गैस की समस्या में नहीं हैं। आयुर्वेद में इसे एक जटिल स्थिति माना जाता है, जिसे कहा जाता है वात-पित्त प्रकोप के साथ ग्रहणी दोष।


इस स्थिति में आपकी पाचन अग्नि पूरी तरह कंफ्यूज हो जाती है।

कभी यह बहुत कमजोर पड़ जाती है, गैस बनाती है, खाना नहीं पचा पाती।

तो कभी अचानक भड़क उठती है और एसिडिटी, जलन और खट्टे डकार पैदा करती है।


इस Post में हम बिना किसी दवा के, सिर्फ आपकी रसोई में मौजूद चीज़ों से इस समस्या को जड़ से ठीक करने का तरीका समझेंगे।

हम जानेंगे वह सीक्रेट रेसिपी जो वजन बढ़ाने में मदद करेगी और वह जादुई चाय जो गैस और एसिडिटी दोनों पर एक साथ काम करेगी।

साथ ही अंत में हम एक पूरा डाइट चार्ट भी डिस्कस करेंगे।


असल में आपके शरीर में हो क्या रहा है?

सबसे पहले यह समझना ज़रूरी है कि परेशानी कहाँ है।


वात दोष के बढ़ने से आपकी आंतें सूख गई हैं।

इस वजह से गैस बनती है, मरोड़ होती है और खाना ठीक से पच नहीं पाता।


वहीं पित्त दोष के कारण पेट के अंदर जरूरत से ज्यादा गर्मी और एसिड बन रहा है।

यह एसिड खाना पचाने के बजाय उसे जला देता है।


यही कारण है कि

• भूख होते हुए भी वजन घट रहा है

• कमजोरी बढ़ती जा रही है

• गैस और एसिडिटी एक साथ परेशान कर रहे हैं


इसलिए हमें ऐसा उपाय चाहिए जो

पित्त के लिए ठंडा हो

और वात के लिए हल्का और पचने में आसान हो।


आपकी रसोई बनेगी आपकी फार्मेसी

दिन की शुरुआत कैसे करें?

सुबह उठते ही चाय और कॉफी पूरी तरह बंद कर दें।

आपके लिए यह अमृत नहीं, ज़हर की तरह काम कर रही है।


आपकी सुबह की शुरुआत होगी अग्निशामक उपाय से।


रात को 10–15 मुनक्का एक गिलास पानी में भिगो दें।

सुबह मुनक्कों को मसलकर उनके बीज निकाल दें।

वह पानी पी लें और मुनक्का भी खा लें।


यह उपाय

• एसिडिटी को तुरंत शांत करता है

• कमजोरी दूर करता है

• पित्त को बिना नुकसान ठंडा करता है


अगर जलन बहुत ज्यादा रहती है, तो

सफेद पेठे का रस पिएं।

यह सबसे क्षारीय ड्रिंक्स में से एक है और अल्सर तक को शांत करने की क्षमता रखता है।


दिन भर पीने वाली चाय जो गैस और एसिडिटी दोनों खत्म करे

अब बात करते हैं उस ड्रिंक की, जिसे आपको दिन भर पानी की जगह पीना है।


इसे आयुर्वेद में कहते हैं CCF Tea।


• आधा चम्मच जीरा (Cumin Seeds)

• आधा चम्मच साबुत धनिया (Coriander Seeds)

• आधा चम्मच सौंफ (Fennel Seeds)


इन्हें चार कप पानी में उबालें, जब तक पानी तीन कप न रह जाए।

छानकर इसे थर्मस में भर लें।


सौंफ आंतों को ठंडक देती है और मरोड़ कम करती है।

धनिया एसिडिटी को न्यूट्रल करता है।

जीरा गैस को पास करने में मदद करता है।


यह मिश्रण धीरे-धीरे आपकी आंतों, लीवर और किडनी को भी साफ करता है।  


वजन बढ़ाने का प्राचीन आयुर्वेदिक नुस्खा

वजन कम होना आपकी सबसे बड़ी चिंता है, और इसके लिए एक बहुत ही असरदार और पुराना नुस्खा है।


खजूर और देसी घी

2–3 अच्छी क्वालिटी के खजूर लें।

बीज निकालें और उसके अंदर थोड़ा सा जमा हुआ देसी घी भर दें।


इन्हें नाश्ते में चबा-चबाकर खाएं।


खजूर शरीर को पोषण देता है और वजन बढ़ाता है।

घी उसे पचाने में मदद करता है।

यह कॉम्बिनेशन शरीर में तुरंत ताकत और ओजस बढ़ाता है।


दोपहर के खाने में क्या करें, क्या नहीं?

दोपहर के खाने में दही बिल्कुल न खाएं।

यह इस स्थिति में भारी पड़ता है।


इसकी जगह बनाएं औषधीय तक्र, यानी मेडिकेटेड बटरमिल्क।


फुल फैट दूध से दही जमाएं।

दो चम्मच दही में एक गिलास पानी मिलाकर अच्छे से मथ लें।

ऊपर आया मक्खन निकाल दें।


अब जो छाछ बची है, उसमें

• चुटकी भर भुना जीरा

• सेंधा नमक

• थोड़ा सा हरा धनिया मिलाएं


यह सबसे बेहतरीन नैचुरल प्रोबायोटिक है, जो आपकी आंतों को रिपेयर करता है।


ध्यान रखें, खाने में सिर्फ सेंधा नमक का ही प्रयोग करें।

साधारण नमक एसिडिटी बढ़ाता है।


आपकी डाइट कैसी होनी चाहिए?

अनाज

पुराना चावल, ओट्स या गेहूं लें।

बाजरा और मक्का बिल्कुल न खाएं, ये बहुत सूखे होते हैं।


दाल

मूंग दाल सबसे बेहतर है।

राजमा, छोले और उड़द दाल फिलहाल बंद कर दें, ये गैस बढ़ाते हैं।


सब्जियां

लौकी, तोरई, कद्दू, परवल खाएं।

कच्चा सलाद बिल्कुल न लें, यह वात बढ़ाता है।


फल

मीठा अनार, पपीता और केला लें।

खट्टे फल जैसे संतरा और मौसंबी से बचें।


हर भोजन में एक चम्मच देसी घी ज़रूर डालें।

घी ही एक ऐसा फैट है जो पाचन अग्नि को मजबूत करता है, बिना एसिडिटी बढ़ाए।


अगर पेट बहुत फूलता है तो यह उपाय करें

हींग का इस्तेमाल करें, लेकिन कभी भी कच्ची नहीं।


हींग को हमेशा देसी घी में भूनकर ही सब्जी या दाल में डालें।

कच्ची हींग बहुत गर्म होती है,

लेकिन घी में भुनने के बाद वही हींग अमृत बन जाती है।


रात की दिनचर्या बहुत ज़रूरी है

सोने से पहले तिल के तेल या नारियल तेल से पूरे शरीर की मालिश करें।

यह वात को शांत करता है और नींद को गहरा बनाता है।


अगर रात को भूख लगे, तो ओजस मिल्क पिएं।

दूध में 10 भीगे हुए बादाम, छिलका उतारकर,

इलायची और केसर डालकर उबालें।


तनाव भी है तो एसिडिटी बढ़ेगी

तनाव सीधे पेट को खराब करता है।

इसलिए रोज़ 10 मिनट

अनुलोम-विलोम और शीतली प्राणायाम ज़रूर करें।


यह कोई जादू नहीं है।

यह विज्ञान है।


क्योंकि हम दवा नहीं ले रहे, इसलिए शरीर को ठीक होने में 21 से 40 दिन लगेंगे।


पहले हफ्ते में जलन कम होगी।

दूसरे हफ्ते भूख खुलेगी।

और तीसरे हफ्ते से वजन बढ़ना शुरू होगा।


आपकी सबसे बड़ी पेट की समस्या क्या है - गैस ज्यादा या एसिडिटी? कमेंट करें 

1 comment:

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